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आवाद गुलजार मधेस अव चमैक उठत – लीलानाथ श्रेष्ठ

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कवि स्नेहलता के दु पंक्ती छै जे बहुत प्यारा छै । कवि स्नेहलता लिख्ने छथिन् ‘‘योनी अनेक मिले सो मिले – लेकिन मिथिला मे रहुँ मिथिला के कहाउँ ’’ कवि जी के मिथिला स एतेक प्रेम किया छै ? जे ओ कहैत छथिन कोनो भी योनी मे जन्म हुये लेकिन मिथिले मे हुये । हमर पहिचान परिचय मिथिला स जुडल रहे । किया की मिथिला के धरति पावन अछि । एतके माटी पानी , संस्कृति , रीति रीवाज , जन जीवन , रहन सहन , खानपान , सव कुछ आनन्द दायक अछि । यी पावन मिथिलाके कुछ भूभाग नेपालके मधेस अछि । ताई लेल मधेस सदा आवाद अछि गुलजार अछि । कवि स्नेहलताक कविता हुनकरक अकेले के अभिव्यक्ति नही अछि । हुनकर पंक्ती पुरा मिथिलावसीक भावना स जुडल अछि । लेकिन जरुरत अछि कि मधेस के बिकासक धारा स जोईडक एकरा चमकाव के । अहि ठाम के जनता जाईग उठ के जरुरत अछि । वास्तविकता स जनताके भेट होई तेकर जतन आ उपाय करवाक जरुरत अछि ।
यी सुन्दरसन चमन मधेस सभक साझा अछि । नेपालक अभिन्न धरति अछि । अही चमनक लेल मधेसी और पहाडी सभक खुन पसिना वहल अछि । यी गुलिस्ताँ सभक खुनस सिंञ्चित अछि । जव यी गुलिस्ताँ के खुन के जरुरत परल मधेसी सवदिन भूमिके रक्षा हेतु वोर्डर पर खडा रहल । यी पावन भूमि पर रहनिहार लोक सव शान्ति आ मिलापक उपासक रहल अछि । प्राकृतिक सम्पदास भरल नेपालक मधेस एक वैभवशाली साँस्कृतिक विरासतके धनी से हो अछि । एक दोसरके सुख दुख मे साथ देवक लेल सदा तत्पर रहनिहार मिथिलाक लोकसव सभक सहअस्तित्व मे विस्वास करैत अछि । लेकिन सत्ताके उपेक्षा र भेदभावके कारण मधेसक वैभव कुछ फिका भगेल । लम्वा समय स अहि ठामक जनता अभाव आ गरीवी मे जीव रहल अछि । ओही कारणस समानता आ न्यायके लेल मधेस भडैक उठल ।
मुदा अव दिन बदैल गेल । अव नेपाल मे न्याय आ समानता के दिन सुरु भगेल अछि । मधेस के गरीवी के दुष्चक्रस निकालै के जरुरत अछि । अव मधेसके भौतिक सुख सुविधा भरवाक जरुरत अछि । अपार प्राकृतिक सम्पदा के सतत् उपयोग स अहि ठाम के समाज आ जनताके उन्नति आ प्रगति के मार्ग बनावै के अछि । रास्ता गलत चुनलास समाज पतालमे भाईस जायत । निक रास्ता पकडलास समाज द्रुत गतिमे अगाडी बढ्त । सही नीति आ सही योजनाके साथ बिकासक द्वार खोलेकै जरुरत अछि । ओकरा लेल सही नेता के चुनाव जरुरी अछि ।
कोनो भी समाजमे बहुत संघर्ष के वाद नेता के जन्म होईत अछि । लेकिन समाजक प्राथमिक कर्तव्य अछि की ओ नेता के सही पहिचान करै । नेता के सही पहिचान मे समाजस चुक भेला स ओ समाज के पतन आरम्भ सुरु होईत अछि । हमहु मधेसक सपुत छि । अहि मधेसक भूमिस संघर्ष कैरके नेता वनल छि । यी मधेस आ मधेसी जनता स हमर प्रीत अछि । हम यही धरति मे जन्मली अहि ठाम जीवन जीवक सदिच्छा अछि । यही धरति पर विश्राम लेवक कामना अछि । अहि ठामक जनताके सेवा करवाक महान आ पवित्र चाह अछि । यही मिथिलास जुडल रहवाक ईच्छा अछि । मधेस के कहवावक चाह अछि । हम प्रण करैछी , अहि आवाद गुलजार मधेस के चमक दमक दुनियामे देखाएव । मधेस चमैक उठत । बिकास स मधेसक धरति के अच्छादित करव । हम मधेसमे बिकास विछाएव । अहि ठाम के जनताके सुख सुविधा मुहैया करायव । यी लीलानाथ श्रेष्ठ के वचनवद्धता भेल ।
सिरहा के क्षेत्र नंं ३ क सव जनता आ मतदाता स हमर विनती अछि हम लीलानाथ श्रेष्ठ के सूर्य छाप मे मत दिउ । तहिना प्रदेश क मे राम कुमार यादव के हसिया हथौडा मे मत द क जिताउ । तहिना प्रदेश ख मे कमरेड प्रमोद यादव के सूर्य छाप मे भोट द क जिताउ । हम सव प्रण करैछि यी मधेसक भूमि चमैक उठत ।