बरस नइँ पाइन

एकटा अनुदित जापानी कविता :
शुन्तारो तानीकावा । जापानक एकटा प्रसिद्ध आ वरिष्ठ कवि । मानविय सम्वेदना आ साँस्कृतिक धरातल अइ कविके कविताके मूल स्वर अइछ । प्रस्तुत अइछ हिनकर एकटा कविताके मैथिली अनुवाद :

राेशन जनकपुरी
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बरस नइँ पाइन
ओइ प्रेम स वञ्चित स्त्री सबपर
बरस नइँ पाइन
अनबहल नोरक बदला
बरस नइँ पाइन चुपचाप !
बरस नइँ पाइन
दराइड़ फाटल खेतसबमे
बरस नइँ पाइन
सुख्खल इनारसबमे
बरस नइँ हाली–हाली !
बरस नइँ पाइन
नापाम (बम)सबके धधरापर
बरस नइँ पाइन
सुड्डाह होइत गाम सबपर
बरस नइँ पाइन घनघोर !
बरस नइँ पाइन
अनन्त मरुभूमिपर
बरस नइँ पाइन
नुकायल बीज सबपर
बरस नइँ पाइन हौले–हौले !
बरस नइँ पाइन
फेर स जीवैत हरियरी सबपर
बरस नइँ पाइन
प्रफुल्लित काइल्हक खातिर
बरस नइँ पाइन आइ !
(अँग्रेजी स अनुदित)
अनुवाद : राेशन जनकपुरी
तस्विरः औरही गाउँपालिका स्थित जलाशय ।

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