पाटी (व्यंग्य)

राेशन जनकपुरी

राेशन जनकपुरी

तीनगो वरिष्ठ उपाध्यक्ष, चाइरगो उपाध्यक्ष, पाँचगो महासचिव, सातगो सह महासचिव, सातगो सचिव, आ दुइएगो प्रवक्ता,
त अध्यक्ष आ कोषाध्यक्ष काहेला एक्केगो रख्खे ? इहो पाँच छौगो बनालेते ! सबकुछ फैल से, त अध्यक्षो फैले स होता !

बाकि आपका मामला है, आपही जानिए । हम त कुछो नइँ बोलेंगे ।
लेकिन एगो बात है ! आइ काइल्ह पाटी, पाटी कम, रमलिल्ला मन्डली बेसी लगने लगा है । फैल स लोक होगा त हरिबोल बेसी बजायगा आ ‘माला’ बेसी असूलेगा ।
खैर सभ्भे इहे करता है, त अहीँ काहे पछुआइएगा ! लगे रहिए । जनता के क्या है ! बोलता है त बोल्ने दिजिए !

आइ काइल्ह जमाने रमलिल्ला आ भजन किर्तन का है । झाइल किनिए, आ जेकरा बजाब’ आ गाब’ आता है तकरो, आ नइँ आता है तकरो, सबके गबैया आ बजबैया का साकिटपिकिट द’ दिजिए, झाइल पकड़ा दिजिए आ गबाइए, बजबाइए । सुरताल के कोन मतलब ? झमर झमर, ढबर ढबर आ टी टोँ पोँ पाँ निकइल गिया त भे गिया । सब समझिये जायगा। भजनियाँ समझिये जायगा आ जनतो के जे समझना है समझिये जायगा। अहिनाही त चलता है रमलिल्ला मन्डली।

बाकि बात को दिल पर मत लिजियेगा, रमलिल्ला हो कि अखुनी के रजनीती, अहिना चलता है ।
बाकि हम त कुछो नइँ बोलेंगे, जनता जनारदन का नइँ पता ! Source: facebook. pic. freepik

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