धोखा (कविता)

राेशन जनकपुरी

राेशन जनकपुरी

मन्दिरक मूर्ति आगू
बेटाके राइख
बजलाह ओ _
हे गोविन्द
अहाँक वस्तु
समर्पित अइछ अहीँके ।
आइ पीटि रहल छैथ छाती
नोँइच रहल छैथ माथ,
बेटा भ’गेलैन्ह ‘शहीद’
गोविन्दक रक्षामे ।
आ गोविन्द,
मूर्तवत् ठाढ़
बजबैत रहलाह बाँसुरी।
ओना अवस्था
मस्जिदके सेहो फराक नइँ अइछ एहि स,
ओत्तहु,
अल्लाहके ‘राह’मे
‘कुर्बान’ भ’गेलहाक हेतु,
छाती पीटि पीटि क’
मनायल जा रहल अइछ
‘मातम’ ।
रहस्यक बात ई अइछ जे,
ईश्वर
आ अल्लाह
दुनू
रहैत अइछ संगहि,
एक्के गाममे,
एक्के ‘महल’मे।
(‘समयगीत’ कविता संग्रह स)

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