साधो ई जग है बिराना

रोशन जनकपुरी
(कबिरहा अन्दाजमे)

साधो ई जग है विराना
गाई समुझिके जेकरा पोसा
ओहो गदहा हो जाना, साधो ….्
हँइस बाइज क भोइर भाइर क
ठइग लिया मतदाना
एक बेर आइब क गिया से गिया
फेर पाँचे बरिसमे आना, साधो……
पहिने रहे सुटकल मुसरी
भुखे चुँ चुँचुआना
सत्ताके संघतमे पैरते
भकुना बिलार बइन जाना, साधो…..
झुठ्ठे लडे टेटहा फेँटहा
एक दोसरके गरियाना
जेसब लडाबे मँङरु ढोढ़ाईके
संगसंग दावत उड़ाना, साधो…….
मठ–मन्दिरमे चढे मालपुआ
भगत भुखे लटुआना
लेकिन चढौना महन्थ पुजारी
जेबीमे घुसियाना, साधो….
कहाँ रहा अब वैरागी सन्तन
कुटी कुटी रसियाना
रसिक ललीके रसमे डूबे
भगत और भगवाना, साधो…..
कहत जनकपुरी सुनु भाइ सोझमति
सब दिस है मनमाना
राजनीति, मठ–मस्जिद सब एक्के
जनताके भरमाना, साधो…
मेहनतके बस करो भरोसा
जेकरा स बचे पराना
बाँकीसब झुठ्ठे हय झुठ्ठे
झुठ्ठेमे भसियाना, साधो….
शेख बरहमन डोमा दर्जी
सबमे रकत बहे समाना
ऊँच नीच तजि,
जात धरम तजि हिया मिलाबे
तब असली फगुआना, साधो….

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