जीवन का सत्य और आत्मबोध

 

डॉ.पूनम यादव

जीवन कितना सहज सरल है
क्यूँ तेरे माथे पर बल है

जो दिखता है उस पर मत जा
इस छल के अंदर भी छल है

कोस रहे हो क्यूँ औरों को
सब अपने कर्मों का फल है

कितना और गिराओगे तुम
भाग्य हमारा बहुत प्रबल है

मर्यादा है हिन्द देश की
वो जिसके सर पर आँचल है

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