मधेश की आवाज़

चन्द्रकिशाेर

चन्द्रकिशाेर

संघीयता कोई सौगात नहीं,
यह मधेश की पहचान है।
जिसके लिए खेतों ने आग उगली,
यह उसकी सच्ची जान है।।

हर सड़क ने क्रांति बोली,
हर छांव ने जख़्म सहे,
शांति की जो राह चुनी,
वो आँधियों से भी न डरे।।

यदि कोई षड्यंत्र रचाए,
हक को फिर से लूटने का,
तो मधेश उठेगा फिर से,
सत्य से झूठ को पिटने का।।

हम न युद्ध चाहते हैं,
न हिंसा का कोई राह,
पर अधिकार अगर छीनोगे,
तो बनेंगे शांति के छांह ।।

लड़े थे जब संघीयता के लिए,
तो रुकेंगे क्यों अब पीछे,
मधेश ना बिकेगा, झुकेगा नहीं,
तारीख़ें गवाह हैं नीचे।।

तो याद रखो ऐ साजिशगारों,
हम प्रेम से जिएंगे ज़रूर,
पर हक की एक भी रेखा पर
सहेंगे न कोई क़ुसूर।।

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