इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं

राजन भण्डारी

क्यों जात धरम में बट गए,क्या तेरा हैं क्या मेरा हैं ।

रंगोंका हैं बस फरक, फिर झंडा क्यों तेरा और मेरा हैं ।।

चलो ज्यो रंगों में बट गए, फिर क्यों लड़ाई तेरा मेरा हैं ।
भगवा हैं शान मेरा,हरा सदके हैं स्वाभिमान तेरा ।।

जन्मे जिस धरती पर, क्यों उसको लहुलुहान किया ।
तू हिन्दू तू मुस्लिम क्यों ये संग्राम किया ।

गैर धरम के नाम पर क्यों इतना आक्रोश भरा ।
कठपुतली बने हो गैरो के,भड़का रहा शैतान यहा ।।

इंसानियत और मानवता से बड़ा न कोई धर्म ईमान यहा ।
में हिन्दू तू मुस्लिम कह बट रहा इंसान यहा ।।

कोई धर्म का रोटी सेक कर आपस मे हैं लड़ा रहा ।
रुक सोच क्यों इंसानियत को गवा रहा ।।

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